युवा शक्ति एवं आत्मविश्वास
चल रही है रेलगाड़ी चल रही है ज़िंदगी,
इस डगर के मार से क्यों डर रही है ज़िंदगी,
रुकती है जो ये लौह पथ पर,
रोकू क्यों मैं अपना मन,
जो मिले उसमे हँसना सिखा रही है ज़िंदगी,
इस डगर की मार से क्यों डर रही है ज़िंदगी,
लोग रोके या न टोके या करे उपहास मेरा,
क्यों मै शर्मा कर उठू, मै क्यों न दौड़ूं एक बार,
राहों मे हैं कितने तिनके,
बिखरे तारों के समान,
ये न सोचो के मैं हारा,
खीची है मैंने कमान,
आसमान को होगा झुकना,
रास्तो को होगा रुकना,
अब जो मैने ठान लिया,
लग रहा सफर भी ठिगना,
क्या हुआ जो एक बार,
हुआ न मुझसे प्रहार,
तोड़ दूंगा मोड़ दूंगा,
ज़िंदगी ही तो है ये यार,
क्या हुआ जो रात बीती,
रात बीती बात बीती,
कल सुबह की रोशनी है
वृहत शत्रु-ललकार सरीखी,
आज जो अपने ना अपने,
कल जो होंगे सच ये सपने,
क्या कहूँ वो आट्टहासी,
भी लगेंगे साथ ठिठकने,
राम तेरी धरती को मै यही सिखलाऊँगा,
ना ही रुकने ना ही झुकने की कसम मै खाऊंगा,
क्या हुआ जो कामयाबी रह गयी दो कदम दूर,
सबको शील तेरे जैसा रखना मै बतलाऊंगा,
कभी-कभी रहना भी रुककर देता बहुतो सीख है,
डर नही अब हारने से ये भी रब की भीख है,
रैलगाड़ी चल पड़ी अब शंका क्यों है ज़िंदगी,
इस डगर के मार से क्यों डर रही है ज़िंदगी,
जो मिला वो रख ले हँसकर आगे बढ़ता जा तू बस,
आगे आने को है मंज़िल सब्र रख तू ज़िंदगी।
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